GARMI MEIN THANDAK KA EHSAS

तेरी चाहत मे ऐसी दीवानी हुई जाती हु
रेगिस्तान मे बरफ महसुस करती हु
दुनिया वाले हसते है मुझपर
पर मै तो बस मोहबत मे मिटी जा रही हु
🌷🌷🌷
तेरे ना होने से ये अहसास हुआ
कि तुम कया हो मेरे
इस दिल की धडकन इन सासों की तान हो
उस रब के बाद कहने को अपना
सिर्फ तुम ही हो मेरे
🌷🌷🌷
इस चिलचिलाती धुप मे छावँ हो तुम
गरम हवायों के थपेडों मे शीतल पवन से हो तुम
तुफान बाद की तबाही मे भी जीने की उम्मीद हो तुम थके हारे मुसाफिर की मजिलं हो तुम
मुझसे कया पुछना मैरे तो सब कुछ हो तुम
🌷🌷🌷

गरमी मे ठंडक का अहसास हो तुम
कभी ना बुझने वाली पयास हो तुम
तपती जमीन पर बारिश की फुहार हो तुम
तुमही मेरी आशिकी तुमही मेरी बंदगी
अब और कया कहु इस रूह की आखिरी मंजिल हो तुम

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