Kyu hai tujhse itni mohabat

कयु तेरी मोहबत फरेब सी लगती है, कयु तुझपर यकीन नही, रोज रासते अलग चुनती हु,पर तेरा खयाल आते ही खुद को तेरी चौखट पर खडा पाती हु

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